मुनिश्री के सानिध्य 48 दिवसीय भक्ताम्बर विधान में श्रृद्धालु कर रहे आरधान, भगवान आदिनाथ महिमा का हो रहा है गुगान
ग्वालियर, 07 अगस्त। जिसने भगवान और गुरू से प्रेम कर लिया, समझो उसे जन्नात मिल गई। संसार में किसी से सच्ची दोस्ती करनी है, तो भगवान से करो। परमात्मा और धर्म से सच्ची दोस्ती ही तुम्हारा कल्याण करेगी। देव, शास्त्र और गुरू के प्रति आस्था-श्रृद्धा रखो। हमेशा यही भावना रखना कि जीवन के अंतिम समय में भगवान और साधु के सानिध्य में मरण हो। भगवान के प्रति 99 फीसद नहीं 100 प्रतिशत आस्था रखो। भगवान पर आस्था रखना प्रहलाद से सीखो। हिरण्य कश्यप राजा की बहन अपने भतीजे को लेकर अग्रि बैठ जाती है, लेकिन भगवान में अटूट आस्था रखने वाले प्रहलाद का बाल बांका भी नहीं होता। भगवान धैर्य की परीक्षा जरूरत लेते हैं, लेकिन बचाने वाला परमात्मा ही है। जबकि आज इंसान थोड़ी विपत्ति आने पर ही मन्दिर जाना छोड़ देता है। यह बात श्रमण मुनि श्री विनय सागर महाराज ने साधनमय वर्षयोग समिति एवं सहयोगी संस्था पुलक मंच परिवार ग्वालियर के तत्वावधान में रविवार को माधवगंज स्थित चातुर्मास स्थल अशियाना भवन में आयोजित 48 दिवसीय श्री भक्ताम्बर महामण्डल विधान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनिश्री ने कहा कि आत्म कल्याण के लिए आराधना जरूरी है, जीवन को सुंदर बनाने के लिए मानव पाप और पुण्य के झमेले में न पड़े। जीवन सुंदर बनाना है तो अपना जीवन धर्म से जोडऩा होगा। पाप और पुण्य की दोस्ती अनादिकाल से जीवात्मा कर रही है। धर्म से दोस्ती करोगे तो जन्म-जन्मांतर का कल्याण हो जाएगा। देव, शास्त्र, गुरु और धर्म का हमेशा उपकार मानो, जो मानव को कर्तव्य पथ पर चलने की सीख देते हैं। धर्म आराधना के बाद ही मानव परमात्मा की शरण पा सकता है।
आत्म सुधार और आत्म समीक्षा जीव का लक्ष्य होना चाहिए
मुनि श्री विनय सागर महाराज ने कहा कि जीव के दो लक्ष्य होना चाहिए आत्म सुधार और आत्म समीक्षा। जिनवाणी हमारे आत्म सुधार का आधार है और गुरु हमारे आत्म समीक्षा का साधन। आत्म सुधार और आत्म समीक्षा पर बात करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य परमेष्ठी बनना है पर उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आत्म सुधार और आत्म समीक्षा आवश्यक है। आत्म सुधार और आत्म समीक्षा का भाव तभी जागृत होगा जब व्यक्ति की कषाय मंद और तीव्र कषाय का अभाव होगा। जीव के अंतरंग में कषाय की मंदता उसके मित्र के समान है।
108 मंत्रों से किया भगवान जिनेन्द्र अभिषेक, दीपका से आरती कर विधान के मण्डप पर चढ़ाए महाअघ्र्य
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनि श्री विनय सागर महाराज ने 108 विशेष मंत्रों का उच्चारण कर इन्द्रों ने पीले वस्त्र धारण कर भक्तिभाव के साथ भगवान आदिनाथ जयकारों के साथ अभिषेक कर दीपकों से महाआरती की। मुनिश्री ने मंत्रों का उच्चारण कर शांतिधारा अनुराग जैन परिवार ने की। पाद प्रक्षालन एवं शास्त्रभेट गुरुभक्तों ने किए। विधानचार्य विजय कुमार व ज्योतिचार्य हुकुमचंद जैन ने भक्ताम्बर के 48 मंत्रों के उच्चारण के साथ विधानकर्ता सोहनलाल, मनोज जैन कॉलेज व अनुराग श्वेता जैन परिवार सहित श्रृद्धालुओं ने अष्टद्रव्य से पूजन कर भजन सम्राट शुभम जैन सैमी के भक्तिमय स्वरों के साथ भगवान आदिनाथ के समक्ष भक्ताम्बर मण्डप पर श्रृद्धा भक्ति से साथ समर्पित किए।