भिण्ड जेल ढहने के बाद जागा गोहद प्रशासन, आनन फानन में किया उपजेल का निरीक्षण

  •  निरीक्षण में बैरकों की छतों से पानी का रिसाव पाया, पीडब्ल्यूडी विभाग मरम्मत में लगा

  • 1997 में हुआ उपजेल का निर्माण, 90 केदियो की क्षमता वाली जेल में 98 कैदी

गोहद/भिण्ड, 31 जुलाई। शनिवार की सुबह भिण्ड में उपजेल की दीवाल गिरने से उसके नीचे दबकर 21 केदियों के घायल होने से जिला प्रशासन के होश उड़ गए, यह खबर पूरे जिले में आग की तरह फैल गई। इसी बीच भिण्ड जेल के कैदियों को अन्य जेलों में शिफ्ट करने किया जा रहा है। भिण्ड जेल ढहने की सूचना मिलने पर गोहद प्रशासन की अचानक आंख खुल गई व जेल की बिल्डिंग का भौतिक सत्यापन करने के लिए एसडीएम शुभम शर्मा, तहसीलदार रामजीलाल वर्मा, थाना प्रभारी गोपाल सिकरवार व पीडब्ल्यूडी के एसडीओ जेल परिसर पहुंचे व जैल बिल्डिंग का निरीक्षण किया।


निरीक्षण के दौरान जेल की बैरक में पानी टपकने व छत की हालात खस्ता पाई गई। बैरक की यह हालत को देखते हुए बैरक की मरम्मत करने के लिए पीडब्लूडी की टीम कार्य में जुट गई। जिससे गोहद जेल में भी कही भिण्ड जेल की तरह हादसा न हो जाए। एक बात समझ से परे है कि किसी भी विभाग का निरीक्षण व मरम्मत के लिए प्रशासन को किसी हादसे का इंतजार क्यों करना पड़ता है, यह कार्य सहज परिस्थितियों में भी हो सकता है। ज्ञात हो कि गोहद उपजेल का निर्माण 1997 में हुआ था। गोहद जेल की क्षमता 90 केदियों की है, इसमें अभी 98 कैदी बंद है।

इनका कहना है-

गोहद जेल में भिण्ड जेल के केदियो को शिफ्ट करना था। इसलिए एसडीएम, तहसीलदार व थाना प्रभारी द्वारा जेल का निरीक्षण किया गया। जेल की एक बैरक में छत से पानी टपक रहा था जिसकी मरम्मत का कार्य जारी है।

हेम सरिता, जेलर उपजेल गोहद

भिण्ड के कैदियों को शिफ्ट करने के लिए जेल का निरीक्षण किया गया। जैल में कुछ जगह मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को निर्देशित किया है।

शुभम शर्मा, एसडीएम गोहद