संसार में ऐसे व्यक्ति भी हैं जिनके पास दौलत तो खूब है, लेकिन शांति नहीं : विनय सागर

मुनिश्री गायत्री नगर पहुंचे, शाम को दानाओली के लिए हुआ विहार

ग्वालियर, 06 जुलाई। व्यक्ति चाहे करोड़ों कमा ले, हीरा-मोती, जवाहरात के ढेर लगा ले, लेकिन रुपए-पैसे से व्यक्ति अमर नहीं बन सकता। धन केवल सुविधा दे सकता है, मृत्यु से विजय नहीं दिला सकता। मृत्यु शाश्वत सत्य है। रुपए-पैसे से मौत पर विजय नहीं पाई जा सकती है। धन से सिफ सुविधाएं ही खरीदी जा सकती है। संसार में ऐसे व्यक्ति भी हैं जिनके पास दौलत तो खूब है लेकिन शांति नहीं है। यह विचार श्रमण मुनि श्री विनय सागर महाराज ने बुधवार को ठाठीपुर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनि श्री विनय सागर महाराज ने रिश्तों पर उद्बोधन देते हुए कहा कि संसार के समस्त रिश्ते स्वार्थ के वषीभूत होकर चल रहे हैं। व्यक्ति जो कुछ करता है वो स्वयं की खुशी के लिए करता है। स्वयं का सुख और स्वयं का प्रेम ही सभी रिश्तों को आगे बढ़ाता है, चाहे रिश्ता पति-पत्नी का हो, बाप-बेटा का हो, भाई-भाई का हो अथवा कोई भी रिश्ता हो सिर्फ स्वयं के स्वार्थ के लिए ही रिश्तें चलते रहते हैं। पति को पत्नी से और पत्नी को पति से सुख मिलता है, पिता यह सोचकर पुत्र का ध्यान रखता है कि वो बुढ़ापे में उसका सहारा बनेगा, वही पुत्र पिता से धन मिले इसीलिए रिश्तों को निभाते हैं। प्रभू से भी व्यक्ति हमेशा कुछ न कुछ लेने की लालसा में ही हाथ जोड़ता है या उसके द्वार जाता है।

जीवन का लक्ष्य आत्म शांति होना चाहिए

मुनिश्री ने कहा कि जीवन का लक्ष्य आत्म शांति होना चाहिए। आत्म शांति इस रंग-बिरंगी मृग मारीचिका में नहीं मिल सकती। शांति भवनों में नहीं, शांति विषयों में नहीं, शांति तो अपने अन्दर है। इस शांति के लिए मात्र अपने अंदर जाना है। जब हम अपनी दृष्टि को पर पदार्थ से यानि विषय कषायों से हटा लेते हैं तो हमारे अन्दर ही शांति का झरना फूट पड़ता है। अपने भीतर देखो, अपने भीतर ही सब कुछ है, अपने भीतर जाना ही दुनियां को समझना है।

गुरू हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं

मुनि श्री विनय सागर महाराज ने कहा कि गुरू हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं और हमें संस्कारित कर होनहार बनाते हैं। हमारे अज्ञान को मिटा कर सूर्य के प्रकाश के समान ज्ञान प्रदान करते हैं। बुराईयों से अच्छाई का मार्ग बताते हैं। गुरू हर समय शिष्य का भला और अच्छा चाहते हैं। कोई भी गुरू किसी भी शिष्य का बुरा नहीं चाहता। गुरू संस्कारों को जन्म देकर हमें अच्छे संस्कार प्रदान करते हुए हमारे जीवन का सुधार करते हैं।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनि श्री विनय सागर महाराज ठाठीपुर स्थित गायत्री विहार गुरूभक्त विकास जैन सोनू के निवास पर पहुंचे। यहां गुरुदेव के पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद लिया। उसकी आहराचार्य भी संपन्न कराई। मुनिश्री शाम को ठाठीपुर से पद विहार कर दाना ओली पहुंचे।