जिसने भगवान को पा लिया हो उसे धन की कोई जरूरत नहीं : आचार्य अवस्थी

श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र का वर्णन सुनकर भाव विभोर हुए श्रृद्धालु

भिण्ड, 11 मई। अटेर क्षेत्र के ग्राम खड़ीत में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन कथा का रसपान करने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रीश्री 108 सुंदरदास जी महाराज गुरुदेव के आशीर्वाद से पारीक्षत अवधेश कटारे और आयोजक श्याम सुंदर कटारे के आयोजन में चल रही।
श्रीमद् भागवत कथा समापन अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक व समाज सुधारक आचार्य मनोज अवस्थी महाराज ने सुदामा चरित्र और पारीक्षत मोक्ष की कथा का बहुत ही सुंदर वर्णन किया। उन्होंने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं, उनसे बड़ा धनवान कोई नहीं था, क्योंकि उनके पास भगवान की भक्ति का धन था और जिसके मित्र साक्षात भगवान हों वो गरीब कैसे हो सकता है? उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था। श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रृद्धालु भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण ने मिलने आए तो उन्होंने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे, बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा। मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए, अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए। जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए।


आचार्यश्री ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है, वहीं कथा कराने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं। उन्होंने श्रीमद् भागवत कथा की पूर्णता प्रदान करते हुए विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने सात दिनों की कथा का सारांश बताते हुए कहा कि जीवन कई योनियों के बाद मिलता है, इसे कैसे जीना चाहिए पण्डाल में उपस्थित श्रृद्धालुओं को समझाया। अंत में कृष्ण के दिव्य लोक पहुंचने का वर्णन किया। बाहर से आए अतिथियों ने महाराज का सम्मान किया। तत्पश्चात महाआरती के बाद भोग वितरण किया गया।

सुदामा भगवान के सच्चे भक्त थे

आचार्यश्री ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा गरीब नहीं थे उनसे बड़ा अमीर कोई नहीं था, क्योंकि उनके पास भगवान भक्ति की सबसे बड़ी दौलत थी और जिसका मित्र स्वयं भगवान थे वो गरीब कैसे हुआ? सुदामा ने संसार में कभी भीख नहीं मांगी। कुछ कथा व्यास सुदामा को भिखारी वेश बनाकर कथा पण्डाल में घुमाते हैं मेरा उनसे निवेदन है कि कोई भी व्यास चंद पैसों के लिए सुदामा को भिखारी बनाकर कथा पण्डाल में न घुमाए, साथ ही कथा स्थल पर कथा सुन रहे श्रृद्धालुओं से भी कहा कि जहां कहीं कथा चल रही हो वहां कथा व्यास से आप निवेदन कर लेना कि सुदामा को भिखारी बनाकर पण्डाल में न घुमाएं, करना ही है तो उनके त्याग और उनकी भक्ति का वर्णन करें।

श्री परशुराम सर्व ब्राह्मण संघ के पदाधिकारियों ने भेंट की भगवान परशुराम की तस्वीर

श्री परशुराम सर्व ब्राह्मण संघ के युवा प्रदेश अध्यक्ष गिरिराज पाण्डेय और प्रदेश सचिव अवधेश शर्मा ने खड़ीत में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक एवं समाज सुधारक मनोज अवस्थी जी महाराज और गुरुदेव श्रीश्री 108 सुंदरदास जी महाराज चित्रकूट धाम को पुष्पहार और अचला ओढ़ाकर, भगवान परशुराम की तस्वीर भेंट कर आशीर्वाद लिया।