दो घण्टे की बारिश में दबोह नगर में सडक पर घुटनों तक भरा पानी

भिण्ड, 03 अगस्त। काफी दिनों से पानी के लिए तरस रहे दबोह के लोगों की आज इन्द्रदेव ने सुन ली और दोपहर में नगर में झमाझम बारिश कर दी। इस बारिश से किसानों के चेहरे तो खिले, वहीं इस बारिश ने दबोह नगर परिषद की कार्य प्रणाली की भी पोल खोल दी। नगर में हुई मात्र दो घण्टे की बारिश ने नगर की ऐसी कोई गली या मुख्य बाजार नहीं बचा जिसमें बाढ़ जैसे हालत पैदा न हुए हों। जबकि दबोह नगर परिषद नालों की सफाई के लिए लाखों रुपए खर्च कर चुकी हैं। लेकिन वह किसकी सफाई और कहां की सफाई में खर्च हुए यह कहना मुश्किल है या फिर सिर्फ कागजी खर्च हुए, तभी तो धरातल पर स्तिथि आज इतनी बेकार दिखी।
वैसे सुबह से ही हल्की बारिश हो रही थी पर दोपहर के समय अचानक बारिश ने तेजी पकड ली और मात्र दो घण्टे की तेज बारिश ने नगर के निचली बस्तियां पानी से लवालव हो गई। वहीं भिण्ड-भाण्डेर रोड पर पानी भरने से रोड तालाब नजर आने लगे, जिसके चलते रोड पर जाम की स्थिति बन गई। नगर के चौक मोहल्ला में लोगों के घरों में पानी घुस गया, तो वहीं रीछा मोहल्ला में काफी जलभराव से आवागमन बंद हो गया है। वहीं पुरानी हाट में बना नाला ओवरफ्लो होने से रोड पर पानी आ गया। स्वयंप्रभा, सरस्वती शिशु मन्दिर स्कूल की गली में पानी भरने के कारण छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी उठानी पडी। इस तेज बारिश ने अपने दो घण्टे में नगर के कई इलाकों को इलाको से काट दिया था। वहीं कोंच रोड स्तिथ कुछ दुकानों में तो नाले का गंदा पानी तक भर गया, जिसकी वजह से दुकानदारों का काफी नुकसान हो गया।

सबसे बडा प्रश्न यह है कि जिला प्रशासन ने वर्षात के पूर्व सभी नाले नालियों की सफाई करने के लिए नगर परिषद को निर्देशित किया था, पर अपने ही अहम में भूली नगर परिषद ने नगर में सफाई की खानापूर्ति कर अपने काम की इतिश्री कर ली।
हर वर्ष लाखों रुपए सफाई व्यवस्था पर होते हैं खर्च, फिर भी सफाई नहीं
चिंतित करने वाली बात यह है कि नप दबोह हर वर्ष लाखों रुपए का लेखा-जोखा सफाई व्यवस्था के नाम पर खर्च करती है। परंतु धरातल पर हर गली, मोहल्ले, चौराहे पर कचडे के ढेर आपको देखने को मिल जाएंगे। लेकिन जब स्वच्छता अभियान का सर्वे करने बाहर की टीम आती है तब जरूर 50 प्रतिशत सफाई सिर्फ दो-तीन दिन के लिए देखने को मिल जाती है। फिलहाल तो इतना कहना मुनासिब होगा कि जब बारिश ने अपने शुरुआती दौर में सडकों को लबालब कर दिया तो आने वाले दिनों में अगर चार-पांच घण्टे लगातार बारिश हुई तो फिर तो आधे से ज्यादा नगर बाढ़ जैसे हालातों में तब्दील हो जाएगा और दुकानदारों को दुकानें खाली करनी पडेंगी। बता दें कि सितंबर 1990 में दबोह बाढ़ के दंश झेल चुकी है, जिसमें नगर के व्यापारियों के साथ-साथ रहवासियों के जान-माल का भी काफी नुकसान हुआ था, फिर भी नगर परिषद ने कोई सबक नहीं सीखा है।
झमाझम बारिश से गिरा मकान, कोई हताहत नहीं
वहीं दो घण्टे की लगातार बारिश का कहर ऐसा बरपा की दबोह नगर के वार्ड क्र.चार में वीरेन्द्र शर्मा फरदुआ वालों के पीछे का मकान ही ढह गया। वार्ड वासियों ने बताया कि मकान वर्षों से खाली पडा है और मकान मालिक बाहर रहते हैं, जिसकी वजह से उसकी देख-रेख नहीं हो पाती थी। फिलहाल तो मकान कच्चा था और कोई रहता भी नहीं था, जिसकी वजह से कोई हताहत नहीं हुआ। वहीं वीरेन्द्र शर्मा ने बताया कि मकान ढहने की सूचना उन्होंने नगर परिषद में कर्मचारी को भी फोन पर दी थी, पर उनका कहना है कि मलवा स्वयं हटवाना पडेगा। लेकिन समस्या यह है कि मकान मालिक बाहर रहते हैं और मकान का मलवा बीच गली में पडा है, जिससे लोगों को गली से निकलने में परेशानी आ रही है।