यदि जीवन में कुछ पाना है तो झुककर ही पाया जा सकता है : विनय सागर

माधवगंज स्थित चतुर्मास स्थल अशियाना भवन पर चल रहे हैं मुनिश्री के मंगल प्रवचन

ग्वालियर, 18 जुलाई। झुकने से विकास और अकडऩे से विनाश होता है, यदि जीवन में कुछ पाना है तो झुककर ही पाया जा सकता है। जैसे हैण्डपंप का हैंडिल बार-बार नीचे झुकाने पर ही पानी आता है। मन्दिरों के छोटे दरवाजे हमें यही शिक्षा देते है कि झुकना सीखो। यह विचार श्रमण मुनि श्री विनय सागर महाराज ने सोमवार को माधवगंज स्थित चतुर्मास स्थल अशियाना भवन में धर्मसभा में व्यक्त किए।


मुनिश्री ने कहा कि जब किसी भी आदमी का मरण होता है, तब घर मुहल्ले में और श्मशान घाट चर्चा करते हुए कहता है कि अरे वह मर गया। सभी को आज नहीं तो कल मर जाना है, लेकिन आदमी क्रियाकलाप को देखकर तो लगता है कि वह कभी नहीं मरेगा। पलभर का भरोसा नहीं सामान सौ वर्ष का इकट्ठा करता है इंसान। ऐसे में हजार काम छोड़कर सत्संग, धर्माचरण करना चाहिए, यही जीवन का सार है।

संसार का मुक्ति का सुख जब भी मिलेगा पुरुषार्थ से ही मिलेगा

मुनि श्री विनय सागर महाराज ने कहा कि धर्म, अर्थ, काम औैर मोक्ष। ये पुरुषार्थ कहे जाते हैं। संसार का सुख या मुक्ति का सुख जब भी मिलेगा पुरुषार्थ से ही मिलेगा। जितने भी जीव सिद्ध हुए हैं या प्रसिद्ध हुए हैं सबने मेहनत और पुरुषार्थ करके ही सफलता पाई है।

जीवन का अंत से पहले प्रभु शरण को स्वीकार कर लो

मुनिश्री ने कहा कि जीवन का अंत से उससे पहले संत व प्रभू अरिहंत की शरण को स्वीकार कर लो। क्योंकि जीवन का कोई भरोसा नहीं है। आज है, कल हो या ना हो। इसलिए धर्म को कल परसों पर मत टालो। आज इसी समय से प्रारंभ कर दो। उन्होंने कहा कि आप बड़ा बनना चाहते हो पर छोटा बनना आपको पसंद नहीं है। छोटे बनकर आप बड़े बनने की राह पर नहीं चलोगे तो आप बड़े नहीं बन सकते। इसलिए बड़े नहीं छोटे बनो, दुनिया आपको अपने आप बड़ा बना देगी।
समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री के मंगल प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे से चातुर्मास स्थल अशियाना भवन डॉ. आहूजा वाली गली माधवगंज ग्वालियर होंगे। मुनिश्री विनय सागर महाराज के साधनमय चातुर्मास कलश स्थापना समारोह 24 जुलाई को दोपहर एक बजे से कार्यक्रम आयोजित होगा।