खेड़ापति हनुमान मन्दिर पर चल रही है त्रिदिवसीय रामकथा

भिण्ड, 27 जनवरी। अखिल कोटि ब्रह्माण्ड नायक परब्रह्म मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, पवनसुत हनुमंत लाल जी की असीम अनुकंपा से प्रति वर्ष की भांति संत सत्संग सम्मेलन खैरापति सरकार मन्दिर ग्राम मेहदौली के तत्वावधान में सनातन धर्म सम्मेलन स्वरूप सानंद 28 जनवरी तक श्रीश्री 1008 महामण्डलेश्वर श्री रामदास महाराज दंदरौआ धाम, श्रीश्री 1008 महामण्डलेश्वर श्री रामभूषण दास महाराज खनेता, श्रीश्री 1008 हरिदास महाराज जड़ेरूआ, श्रीश्री 1008 कमलदास महाराज टीकरी के सानिध्य में प्रारंभ होकर द्वितीय दिवस गुरुवार को मंचासीन श्रीश्री 1008 रामशरण दासजी महाराज प्रज्ञाचक्षु (बृन्दावन), श्रीश्री 1008 श्री सीताराम जी महाराज (बृन्दावन), पं. हैवरन शास्त्री, साध्वी श्रीकृष्ण देवी रामायणी, कुंजबिहारी बरुआ, मंच संचालक पं. बासुदेव शास्त्री लालपुरा वाले मंचासीन रहे।


खेड़ापति हनुमान मन्दिर पर चल रही त्रिदिवसीय रामकथा महोत्सव में विद्वानों ने आज भरत जैसे भाई पर कथा सुनाते हुए बताया कि समाज और राष्ट्र को रामराज्य की स्थापना के लिए युवाओं को भरत जैसा भाई बनना पड़ेगा, हमारे देश का नाम भारत यूं नहीं है, जहां भरत जैसे भाई हो उसी का नाम भारत है। भरत धर्म, अर्थ की साक्षात प्रतिमूर्ति थे, भरत जैसा त्याग, तप और उदारता का दूसरा कोई उदाहरण नहीं, आधुनिक समाज में भरत जैसा भाई नजर नहीं आता, अच्छा ग्रहस्थ जीवन को जीने के लिए अच्छे परिवार की आवश्यकता होती है। हमारा भाई अच्छा है, हमारे माता-पिता से परिवार में सामंजस्य एक-दूसरे की बात मानते हैं, एक-दूसरे का आदर करते हैं, यही वास्तव में रामराज्य है, जात-पात का कोई भेद नहीं, जहां कोई वर्ण भेद नहीं, जहां केवल समाज हित, राष्ट्रहित सर्वोपरि है वही वास्तव में रामराज्य है, रामराज्य की जब हम बात करते हैं तब भरत जैसा भैया चाहिए, लक्ष्मण जैसा सेवक चाहिए, हनुमान जी जैसा ब्रह्मचारी चाहिए, माता जानकी जैसी धर्मपत्नी चाहिए, कौशल्या, सुमित्रा जैसी माताएं चाहिए, तब जाकर के हम रामराज्य की कल्पना कर सकते हैं।