आचार संहिता को देखते हुए धरना स्थगित, आंदोलन जारी रहेगा

भिण्ड, 28 मई। गौरी सरोवर के किनारे समाजसेवियों द्वारा लगाए गए 12 साल पुराने पीपल, वरगद, नीम इत्यादि वृक्षों की प्रशासन द्वारा शिफ्टिंग के नाम पर हत्या की जा रही थी, इन वृक्षों की रक्षा हेतु जिले के समाजसेवी, पर्यावरण प्रेमी, धार्मिक संगठन, छात्र-छात्राओं सहित जिला के युवावर्ग द्वारा वृक्षों के बचाव के लिए प्रशासन को ज्ञापन दिया गया। उसके बाद भी जब वृक्षों को हटाना बंद नहीं किया गया, तब समाजसेवियों ने गौरी के किनारे अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था जो निरंतर चल रहा था। धरने के नौंवे दिन प्रशासन को सूचित कर रैली का आयोजन रखा गया, जिसका उद्देश्य कलेक्ट्रेट पहुंच कलेक्टर से निवेदन कर वृक्षों की रक्षार्थ लिखित आश्वासन लेना था, किंतु कलेक्ट्रेट परिसर में चार घण्टे बीतने उपरांत भी कलेक्टर आंदोलनकारियों से नहीं मिले। बल्कि आंदोलनकारियों को डराने हेतु तहसीलदार ममता शाक्य द्वारा षड्यंत्र पूर्वक मुकद्दमा दर्ज करवा दिया, जिसकी जितनी निंदा की जाए कम होगी। हम सब लोग समाजसेवी हैं, कोई अपराधी नहीं, वृक्षों की रक्षा करना अगर अपराध है तो हम बारम्बार खुद को अपराधी स्वीकार करते हैं। उक्त जानकारी प्रेस को जारी विज्ञप्ति में किसान नेता राजीव दीक्षित ने दी।
दीक्षित ने बताया कि शासन और प्रशासन एक तरफ तो वृक्ष बचाओ-वृक्ष लगाओ का ढिढोरा पीटता है, दूसरी तरफ पीपल, वरगद जैसे वृक्ष जो कि न केवल हिन्दू धर्म में पूज्यनीय बल्कि सबको 100 प्रतिशत ऑक्सीजन देने वाले जिनको नष्ट कर ये लोग पर्यावरण संरक्षण के दुश्मन बन बैठे हैं। इन सबने मिल कर वृक्ष सौंदर्यीकरण की योजना बनाते समय वृक्षों के बारे में हटाए जाने की जगह बनाए रखे जाने के लिए विचार क्यों नहीं किया? उत्तर दाई कौन है। भिण्ड का जन साधरण 30 वर्षों से सौंदर्यीकरण का नंगा नाच देख कर भी मौन रहा। तब ये लुटेरे थे अब हत्यारे है। जनसाधारण सिर्फ वृक्षों का जीवन चाहता है। उन्होंने बताया कि आचार संहिता को देखते हुए धरना स्थगित किया गया है किंतु आंदोलन जारी रहेगा।