भारत भूमी संत को भूमी : राघवेन्द्र पाराशर

कथा के दूसरे दिन भाव विभोर हुए श्रोता

भिण्ड, 28 मई। श्री जागा सरकार हनुमान मन्दिर मौ पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास संत राघवेन्द्र पाराशर ने कहा कि संत को समझने में यदि भूल हो गई तो परिणाम बहुत ही घातक होता है, राजा परीक्षित ने समीक मुनि को असली संत ना समझते हुए नकली समझा गले में मरा हुआ सर्फ डाल दिया। समीक ऋषि पुत्र ने परीक्षित को श्राप दिया। सातवें दिन तक्षक नाग के काटने से तुम्हारी मृत्यु होगी। भारत भूमि संतो की भूमि है, यहां संत अपनी तपस्या के प्रभाव से मानव जाति का उद्धार करता हैं। इसलिए संतो की महिमा हमारे धर्म ग्रंथों में गाई गई है। हमें भी संतों की सेवा करना चाहिए। प्राचीन काल से लेकर आज वर्तमान तक हमारे भारत देश में धर्म प्रधान देश के अलावा ऋषि-मुनियों एवं गुरुओं की सदा पूजा होती आई है। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम माता-पिता एवं गुरू संतों की पूजा हमारी संस्कृति की मूल भावना सर्वोपरि है।