रिश्वत लेने वाले आरोपी को तीन वर्ष कारावास एवं दस हजार का जुर्माना

रजिस्ट्री वापस करने की ऐवज में ली थी रिश्वत

सागर, 30 दिसम्बर। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) जिला सागर आलोक मिश्रा की अदालत ने रजिस्ट्री वापस करने के ऐवज में रिश्वत लेने वाले आरोपी प्रवीण कुमार जैन को दोषी करार देते हुए भ्रषचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा-7 के अंतर्गत तीन वर्ष सश्रम कारावास एवं दस हजार रुपए जुर्माने की सजा से दण्डित किया है। मामले की पैरवी प्रभारी उपसंचालक (अभियोजन) धर्मेन्द्र सिंह तारन के मार्गदर्शन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी लक्ष्मी प्रसाद कुर्मी ने की।
जिला लोक अभियोजन सागर के मीडिया प्रभारी के अनुसार घटना संक्षिप्त में इस प्रकार है कि छह जून 2019 को आवेदक शैलेन्द्र दुबे ने पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त सागर को संबोधित एक शिकायती आवेदन इस आशय का दिया कि उसने अपने पिता के नाम से अलग-अलग तीन रजिस्ट्री/ विक्रय पत्र करवाई थी, जिनमें से रजिस्ट्रार (अभियुक्त प्रवीण) ने दो रजिस्ट्री उसे दीं व तीसरी रजिस्ट्री अपने कब्जे में रख ली, जिसे वापिस देने के ऐवज में अभियुक्त प्रवीण द्वारा तीन हजार 500 रुपए रिश्वत राशि की मांग की जा रही है, वह रिश्वत नहीं देना चाहता है, बल्कि अभियुक्त को रंगे हाथों पकडवाना चाहता है। अत: कार्रवाई की जाए। उक्त आवेदन पर अग्रिम कार्रवाई हेतु उप पुलिस अधीक्षक राजेश खेडे को अधिकृत किया। आवेदन में वर्णित तथ्यों के सत्यापन हेतु एक डिजीटल वॉयस रिकार्डर दिया गया, इसके संचालन का तरीका बताया गया, अभियुक्त से रिश्वत मांग वार्ता रिकार्ड करने हेतु निर्देशित किया, तत्पश्चात आवेदक द्वारा मांग वार्ता रिकार्ड की गई, अन्य तकनीकि कार्रवाईयां एवं ट्रेप कार्रवाई आयोजित की गई। नियत दिनांक को आवेदक द्वारा अभियुक्त को राशि दी गई व आवेदक का इशारा मिलने पर ट्रेपदल ने मौके पर पहुंचकर अभियुक्त को घेरे में लिया। रिश्वत राशि के बारे में पूछने पर तीन हजार रुपए अभियुक्त प्रवीण ने ऑफिस के चैंबर में रखी टेबिल की ड्रॉज में रख देना बताया। उक्त आधार पर प्रकरण पंजीबद्ध कर मामला विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान साक्षियों के कथन लेख किए गए, घटना स्थल का नक्शा मौका तैयार किया गया, अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 12, 13(1)(बी), सहपठित धारा 13(2) का अपराध आरोपी के विरुद्ध दर्ज कर विवेचना उपरांत चालान न्यायालय में पेश किया। जहां विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा साक्षियों एवं संबंधित दस्तावेजों को प्रमाणित किया गया, अभियोजन ने अपना मामला संदेह से परे प्रमाणित किया। विचारण उपरांत विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) सागर आलोक मिश्रा के न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उपरोक्त सजा से दण्डित किया है।