दलितों के मसीहा थे बाबू जगजीवनराम : त्रिपाठी

पूर्व प्रधानमंत्री बाबू जगजीवनराम की 36वी पुण्यतिथि मनाई

भिण्ड, 06 जुलाई। बुद्ध मुस्कुराए सेवा संघ द्वारा चंदनपुरा अटेर रोड पर दलितों की मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री बाबू जगजीवनराम की 36वीं पुण्यतिथि मनाई गई। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में नगर कांग्रेस अध्यक्ष संतोष त्रिपाठी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पानसिंह जाटव एवं संचालन अनिल जाटव ने किया।
इस अवसर पर नगर कांग्रेस के अध्यक्ष संतोष त्रिपाठी ने कहा कि बाबूजी ने दिसंबर 1885 में बनी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अपनी मां के समान बताया व इसकी सेवा में सदैव आगे रहे। बाबूजी वर्ष 1937 से 77 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य रहे, स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत वे कांग्रेस के लिए अपरिहार्य हो गए थे। बाबू जगजीवनराम महात्मा गांधी के प्रिय तो थे ही, साथ ही पं. जवाहरलाल नेहरू एवं श्रीमती इन्दिरा गांधी के सबसे अहम सलाहकारों में से भी एक थे। वर्ष 1966 में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के निधनोपरांत कांग्रेस पार्टी का आपसी मतभेदों व सत्ता की लड़ाई के कारण बंटवारा हो गया। जहां एक तरफ नीलम संजीवा रेड्डी, मोरारजी देसाई व कुमारसामी कामराज जैसे दिग्गजों ने अपनी अलग पार्टी की रचना की, वहीं श्रीमती इन्दिरा गांधी, बाबू जगजीवनराम व फकरुद्दीन अली अहमद जैसे आधुनिक सोच के व्यक्ति कांग्रेस पार्टी के साथ खड़े रहे। वर्ष 1969 में बाबूजी निर्विरोध कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के रूप में स्वीकारे गए व बाबूजी ने पूरे देश में कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने व उसकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए पूर्ण प्रयास किया। जिसके परिणाम स्वरूप कांग्रेस पार्टी 1971 के आम चुनावों में ऐतिहासिक व प्रचण्ड बहुमत के साथ सत्ता में लौट आई। श्रीमती इन्दिरा गांधी ने इस ऐतिहासिक घटना का श्रेय बाबूजी को देते हुए कहा- बाबू जगजीवनराम भारत के प्रमुख निर्माताओं में से एक हैं। देश के करोड़ों हरिजन, आदिवासी, पिछड़े व अल्पसंख्यक लोग उन्हें अपना मुक्तिदाता मानते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पानसिंह जाटव ने कहा कि बाबू जगजीवनराम के राजनीतिक जीवन का आगाज कलकत्ता से ही हुआ। कलकत्ता आने के छह महीनों के भीतर ही उन्होंने विशाल मजदूर रैली का आयोजन किया, जिसमें भारी तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया। इस रैली से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी को भी बाबूजी की कार्य क्षमता व नेतृत्व क्षमता का आभास हो गया। इस काल के दौरान बाबूजी ने वीर चन्द्रशेखर आजाद तथा सिद्ध हस्त लेखक मंमथनाथ गुप्त जैसे विख्यात स्वतंत्रता विचारकों के साथ काम किया। वर्ष 1934 में जब संपूर्ण बिहार भूकंप की तबाही से पीडि़त था तब बाबूजी ने बिहार की मदद व राहत कार्य के लिए अपने कदम बढ़ाए। बिहार में ही पहली बार उनकी मुलाकात उस काल के सबसे महत्वपूर्ण, प्रभावशाली व अहिंसावादी स्वतंत्रता सेनानी मोहन दास करमचंद गांधी अर्थात् महात्मा गांधी से हुई। महात्मा गांधी ने बाबू जगजीवन राम के राजनीतिक जीवन में एक बहुत अहम भूमिका निभाई।
इस अवसर पर सुनील कांकर, मुकेश गर्ग, राजेन्द्र पाठक, सतवीर कमल, अशोक पटवारी, कुलदीप भारद्वाज, राहुल निवारी, सुनील पवैया, मायाराम हलवाई, राजकुमार कमल, मुनेन्द्र पाठक, कमलेश नर्वस, छोटे जारी, दुर्गेश बलोठिया, शुभम दुबे, दीपू बोहरे, शिवम शर्मा आदि उपस्थित रहे।