नहीं मिली डीएपी यूरिया खाद, खाली हाथ लौटे किसान

किसान बोले-लाइन में लगने के बाद भी नहीं मिल रही खाद, जिले में खाद की बेहद कमी

भिण्ड, 26 सितम्बर। कृषि विभाग डींगें हांक रहा है कि जिले में पर्यापत डीएपी एवं यूरिया खाद का भण्डारण है। बावजूद इसके सुबह छह बजे से लाइन में लगने के बाद भी जिले के किसानों को खाद नहीं मिल पाई और शाम को उन्हें खाली हाथ ही वापस घर लौट जाना पड़ा। भिण्ड जिले की आय का सबसे बड़ा जरिया खेती और बड़ा तबका किसान है। किसानों को खाद की जरूरत है। इन दिनों ज्वार और बाजरा की फसल खेतों में खड़ी है, साथ ही दस दिन बाद सरसों की बुआई होनी है। लेकिन खाद की कमी इन फसलों को बर्वाद करने पर तुली है। शासन और प्रशासन जिले में पर्याप्त मात्रा में फर्टिलायजर उपलब्ध होने का दावा कर रहे हैं लेकिन जब लाइन में लगकर खाद लेने के लिए पहुंच रहे किसानों की पीड़ा उन दावों की पोल खोल रही है।
खाद वितरण केन्द्रों पर लम्बी कतारें
भिण्ड स्थित एमजेएस ग्राउण्ड और मेहगांव कृषि उपज मण्डी में बनाए गए खाद वितरण केन्द्र पर किसानों और महिलाओं की लम्बी कतारें लगी थी। कुछ लोग घण्टों से खड़े थे तो कई किसान सुबह छह बजे से शाम तक अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। किसानों से बात करने पर उन्होंने बताया कि वह सुबह छह बजे से आकर लाइन में लगे हैं, लेकिन केन्द्र पर पर्याप्त व्यवस्थाएं न होने की वजह से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि कि अमूमन केन्द्र खोलने का समय सुबह 11 बजे से हैं, लेकिन कर्मचारी 12 बजे के बाद पहुंचते हैं। जिसकी वजह से लाइन लंबी हो रही है और इंतजार करने वाले किसानों का समय भी लंबा हो रहा है। साथ ही रकबे के हिसाब से भी फर्टिलायजर नहीं मिल पा रहा है।

स्टॉक के मुताबिक हो रहा वितरण

कृषि विभाग के एडीओ जितेन्द्र सिंह राठौर ने चर्चा के दौरान बताया कि जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है। स्टॉक के मुताबिक वितरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार जो किसान अपने आधार कार्ड और किताब लेकर आ रहा है, उनके लिए अधिकतम तीन बोरी डीएपी और पांच बोरी भी यूरिया देने का निर्देश है। वहीं जिन किसानों के पास किताब नहीं हैं, उन्हें दो बोरी यूरिया दिया जा रहा है, डीएपी नहीं दे पा रहे। उनका कहना था कि वर्तमान में दो सौ टन डीएपी उपलब्ध कराया गया था, जिसमें से 80 फीसदी के्रडिट पर लेने वाली सोसाइटियों को भेज दिया गया है। ऐसे में सिर्फ 40 टन डीएपी खाद हमारे पास उपलब्ध है, जो किसानों को वितरण किया जा रहा है।

कलेक्टर ने माना- डीएपी की है कमी

भिण्ड कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने भी यह माना है कि जिले में डीएपी की कमी है, मांग अभी और बढ़ सकती है। उनका कहना है कि वे प्रयास कर रहे हैं कि पर्याप्त मात्रा में इसकी व्यवस्था रहे, जिससे किसानों को परेशानी ना हो, लेकिन किसानों को प्रशासन की बातों पर भरोसा नहीं है। यही वजह है कि वे अपनी फसल बचाने के लिए प्राइवेट दुकानों और सोसाइटियों की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि समय रहते अगर खाद नहीं मिला तो उनकी पूरी मेहनत बर्वाद हो जाएगी।