डीईओ ही नहीं, कलेक्टर पर भारी है क्र.दो विद्यालय के प्रधानाध्यापक

भिण्ड, 14 सितम्बर। जिला में शिक्षा विभाग में कहां तक भ्रष्टाचार और अवस्थाएं एवं मनमानी का दौर चल रहा है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्र.दो गोहद से ही पता चल जाता है। जहां पदस्थ प्रधानाध्यापक देशराज सिंह ने अपने लंबे 14 वर्ष के कार्यकाल में विद्यालय में व्यवस्था के नाम पर टेबल तक नहीं जुटा पाई, कोरोना संकट के बाद विद्यालय में छात्र-छात्राओं का आना प्रारंभ हो गया है। परंतु उनके लिए बैठने के लिए टाट पट्टी पीने के लिए पानी तक की व्यवस्था नहीं है। विद्यालय भवन में चारों ओर गंदगी का अंबार दिखाई देता है। क्लास के दरवाजे पर ट्रैक्टर ट्राली खड़ी रहती है और भैंस बंधी रहती है, प्रधानाध्यापक द्वारा कोई प्रतिकार नहीं किया जाता। छात्र-छात्राओं के लिए जो टॉयलेट बने हैं गंदगी छुपाने के लिए उनमें ताले पड़े रहते हैं। जो पंखे लगे हैं वह अधिकांश बंद रहते हैं। विद्यालय स्टाफ को रेका अलमारी तक नहीं दी गई हैं और जो भी अलमारी हैं उनमें ताले पड़े हुए हैं या फिर उनमें जंग के कारण बंद हो गई है जो खुलती नहीं है। पानी की बूंद बादल से गिरते ही जमीन पर आ जाती है, आता है कक्षाओं में बरसात होते ही पानी भर जाता है। बच्चों के लिए हाथ धोने और पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, एक वर्ष से अधिक समय से मध्यान भोजन पूरी तरह से बंद है। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने अपने कक्ष पर प्राचार्य लिखवाया है और मनमानी पूर्ण व्यवहार करते हैं। इस बारे में सभी अधिकारियों से बात की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यहां तक कि कलेक्टर के अनुमोदन से जिला शिक्षा अधिकारी भिण्ड द्वारा इन्हें झांकरी हाईस्कूल के लिए विगत दिसंबर जनवरी में कार्यमुक्त किया गया था, लेकिन इन्होंने मनमानी और हठधर्मिता बनाए हुए खण्ड शिक्षा अधिकारी के आदेश का कोई पालन नहीं किया और आज भी विद्यालय में तानाशाही पूर्ण कार्य करते हुए मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं, विद्यालय में पालक शिक्षक संघ की बैठक भी नहीं होती है, यह तो केवल चेक पर इकट्ठे हस्ताक्षर कराकर भुगतान कर रहे हैं, शिक्षा विभाग की यह दशा सोचने योग्य वरिष्ठ अधिकारियों को शीघ्र ही कार्रवाई कर ऐसे हटधर्मी प्रधानाध्यापक को विद्यालय और छात्र हित में शीघ्र ही गोहद से कार्यमुक्त कर अन्यत्र भेज कर तथा जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।