देश को हरा-भरा देखना है तो चश्मा बदलिए

– राकेश अचल


देश बदल रहा है, ये अगर सरकार कह रही है तो देशवासियों को मान लेना चाहिए। इसी में देश और देशवासियों की भलाई है। क्योंकि असहमति तथा इनकार का कोई मतलब नहीं है। सरकार कह रही है कि जम्मू कश्मीर बदल रहा है तो निश्चित ही बदल रहा है। केन्द्र सरकार देश के समेकित विकास के लिए बीते एक दशक से खून-पसीना बहा रही है। सरकार ने राज्यों के तीव्र विकास के लिए डबल इंजन लगाने का आव्हान किया था। कर्नाटक और तेलंगाना ने नहीं माना, लेकिन मप्र, राजस्थान और छत्तीसगढ ने मान लिया। अब देखना इन तीनों राज्यों का विकास कितनी तेजी से होता है। अलवत्ता नये इंजन ड्राइवर तय करने में केन्द्र सरकार का खुद तेल निकल गया।
कहते हैं कि जिन तिलों में जान होती है, तेल भी उन्हीं में से निकलता है। जो तैलीय नहीं होते वे तेलंगाना जैसे होते हैं। जो डबल इंजन न लगाने की वजह से बाद में रोते हैं। नहीं रोते तो उन्हें दिल्ली की सरकार रुलाती है। जिन राज्यों में एक इंजन की सरकारें हैं उनकी दशा देख लीजिए। अभी तक का तजुर्बा कहता है कि डबल इंजन लगाने में ही भलाई है। यह राष्ट्रहित में भी आवश्यक है। हमें देश को चंद्रयान की गति से आगे ले जाना है। विश्व गुरू बनना है। पांच ट्रिलियन की अर्थ व्यवस्था बनना है तो कुछ न कुछ तो त्याग करना ही पडेगा। बेहतर हो कि हम गांधी-नेहरू का त्याग कर दें। नेहरू का तो कर ही सकते हैं। और बेहतर हो कि हम कांग्रेस का त्याग कर दें। एक बार करके तो देखिए। हमें कभी-कभी अपने नायकों, खलनायकों तक की बात मानना चाहिए, यदि राष्ट्रहित उससे जुडा हो तो ऐसा करने में आखिर क्या बुराई है?
भारत देश महान देश है। ये देश पूरे 33 साल बिना भाजपा के चला कि नहीं चला? भाजपा 1980 में आई। देश 1947 में आजाद हुआ। तब भाजपा नहीं थी, लेकिन देश को आजाद होना था सो हुआ। आज भाजपा है तो देश को विश्व गुरू बनने से कौन रोक सकता है? यदि कांग्रेस ऐसा करती है तो उसे पातक लगेगा। वैसे भी भाजपा तो कांग्रेस को शुरू से पातकी, अधम मानती ही है। बकौल भाजपा यदि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू न होकर नरेन्द्र मोदी जी होते तो देश न जाने कहां होता! इस समय देश मजबूत है। जम्मू कश्मीर मजबूत है। जम्मू कश्मीर में भले ही चार साल से विधानसभा नहीं है तो क्या हुआ? जम्मू कश्मीर इस बात की मिसाल है कि बिना विधानसभा के भी कोई सूबा तरक्की कर सकता है, बाशर्त कि उसे भाजपा का, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का आशीर्वाद प्राप्त हो। मोदी युग में यही श्रेयस्कर है।
हम उस पीढी के लोग हैं जिन्होंने नेहरू युग, इन्दिरा गांधी युग से लेकर चौधरी चरण सिंह और अटल बिहारी वाजपेई युग भी देखे हैं। हमारा जन्म सफल न होता यदि हम मोदी युग न देख पाते। अब हमें कोई पश्चाताप नहीं है। वे अभागे हैं जिन्होंने मोदी युग नहीं देखा। जो लोग नेहरू युग को स्वर्ण युग मानते हैं वे गलत हैं। मोदी युग में सोना कितना सस्ता था, आज देखिए सोना कहां है। सोने को मान प्रतिष्ठा मोदी युग में रुपया डालर के मुकाबले कहां से कहां पहुंच चुका है।
हम लौटकर जम्मू कश्मीर आते हैं। सरकार कितनी मेहरबान है इस सूबे पर। आरक्षण और परिसीमन के लिए एक छोडकर दो-दो विधेयक ले आई। कांग्रेस ने कभी ऐसा किया? फारूक अब्दुल्ला साहब ने सोचा कभी जम्मू-कश्मीर के बारे में। सबके सब निकम्मे निकले। एक मोदी जी और शाह साहब हैं, कितनी फिक्र करते हैं जम्मू-कश्मीर की! मेरा बस चले तो मैं दोनों महानुभावों को ‘भारत रत्न’ से नवाज दूं। लेकिन बुंदेली में कहते हैं कि ‘मन होंसिया, करम गढिया’। करम यानि नसीब वाले तो केवल और केवल मोदी जी और शाह साहब हैं। वे नेहरू से श्रेष्ठ हैं। वे सरदार बल्लभभाई पटेल से श्रेष्ठ हैं।
हमें गर्व है कि मोदी जी एकनिष्ठ भाव से देशसेवा में लगे हैं। वे न नेहरू की तरह सिगरेट पीते हैं, न पेरिस से अपने कपडे धुलवाते हैं। गोपनीयता का नियम न होता तो मुमकिन है कि आपको पता चलता कि दोनों अपने कपडे अपने हाथों से धोते हैं। बहरहाल हम नए साल में नए राम मन्दिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होते देखेंगे। नेहरू गांधी का युग ये दिन कहां दिखा पाए। मोदी युग में बनी नई संसद हमने देख ही ली। अभी बहुत कुछ नया-नया आने वाले समय में हम देखेंगे। लेकिन ये सब दिखेगा तभी जब आप अपना चश्मा बदल लें। आप खुद बदलें तो बेहतर अन्यथा आपको ऐसा करने के लिए बाध्य भी किया जा सकता है।