मनुष्य की आत्मा पर धर्म का रंग चढ़ाना चाहिए : विनय सागर

48 दिवसीय भक्ताम्बर विधान में गूंज रही आदिनाथ की आरधान

 संगीतमय भजनों की भक्ति में भक्तगण लग रहे हैं डुबकियां

ग्वालियर, 28 जुलाई। धर्म करने से पहले और धर्म के करने के बाद हमारे व्यवहार में स्वभाव में बदलाव आए तो समझना धर्म का असर हुआ है। कैमरा के लेंस में अगर मिट्टी लगती है तो तस्वीर साफ सुंदर नहीं आती, वैसे ही धर्म क्रिया शुद्ध नहीं होगी तो आत्मा हमारी शुद्ध नहीं होगी। मनुष्य की आत्मा पर धर्म का रंग चढ़ाना चाहिए। यह बात श्रमण मुनि श्री विनय सागर महाराज ने 48 दिवसीय श्री भक्ताम्बर महामण्डल विधान के पांचवें दिन रविवार को माधवगंज स्थित चतुर्मास स्थल अशियाना भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।


मुनि श्री विनय सागर महाराज ने कहा कि जीवन के अंदर यह निरीक्षण करना अत्यावश्यक है कि धर्म क्रिया के बाद हमारे में बदलाव क्या आया? वैसा ही क्रोध, वैसी ही माया, वैसा ही स्वभाव, अगर परिवर्तन नहीं होता है तो समझना आज तक हमें धर्म का योग हुआ है, प्रयोग नहीं हुआ। दवाई जेब में रखने से नहीं चलता, उसका प्रयोग भी करना पड़ता है, तभी शरीर में से रोग जाता है, वैसे ही आत्मा में लगे कर्मों को भगाना है तो मात्र धर्म क्रिया तक सीमित नहीं रहना है, अपितु धर्म क्रिया को आत्मसात करना है। हमारे रोम रोम में धर्म होगा तभी संसार के परिभ्रमण अंत होगा। हमारी स्थिति हाथी के जैसी है।

जुनून हमें भगवान की भक्ति में रखना होगा

मुनि श्री विनय सागर महाराज ने कहा कि जो लोग संयम के मार्ग पर चलते हैं, सरल स्वभावी होते हैं, वह निरंतर प्रगति को प्राप्त करते हैं। हमें कर्म प्रधान होना होगा। कर्मों की प्रधानता ही व्यक्ति को महान बनाती है। कर्म किए जाओ, फल की चिंता मत रखो, कर्म अच्छे होंगे तो फल भी अच्छा ही मिलेगा जुनून हमें भगवान की भक्ति में रखना होगा। मोक्ष मार्ग में लगाना होगा। तभी जाकर हमारा मार्ग प्रशस्त होगा। जिस प्रकार बीज को सही समय पर बोने, उचित देख-रेख करने, सही समय पर काटने पर उचित लाभ मिलता है, मन्दिर जब छोटा लगने लगे तो उसे तत्काल बड़े मन्दिर में परिवर्तित करना आवश्यक होता है। क्योंकि व्यक्ति के मन में धर्म की भावना मन्दिर पहुंचने के उपरांत ही आती है।

भक्ताम्बर विधान में श्रीजी हुई शांतिधारा, मढऩे पर चढ़ाए महाअघ्र्य

जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनि श्री विनय सागर महाराज ने मंत्रों से भगवान आदिनाथ का अभिषेक इन्द्रों ने पीले वस्त्र धारण कर कलशों से जयकारों के साथ किए। उन्होंने मंत्रों का उच्चारण कर शांतिधारा चक्रेश जैन व जितेन्द्र जैन ललितपुर परिवार ने की। मुनिश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट मुन्नीदेवी संदीप जैन परिवार मुरैना ने किए। विधानचार्य विजय कुमार जैन व ज्योतिचार्य हुकुमचंद जैन ने भक्ताम्बर के 48 ऋद्धि-सिद्धि महाकाव्यों मंत्रों के उच्चारण के साथ विधान कर्ता जितेन्द्र जैन, चक्रेश जैन परिवार सहित अन्य श्रृद्धालुओं ने अष्टद्रव्य से पूजन कर भजन सम्राट शुभम जैन सैमी के भक्तिमय स्वरों के साथ भगवान आदिनाथ के समक्ष भक्ताम्बर मढऩे पर श्रृद्धा भक्ति से साथ समर्पित किए।