माता-पिता पहले खुद समझें चाइल्ड एब्यूज क्या है : नीलकमल

सिटी सेंट्रल स्कूल में जागरुकता शिविर आयोजित

भिण्ड, 16 जुलाई। महिला बाल विकास समिति भिण्ड द्वारा ऑल इंडिया एनजीओ एसोसिएशन के सहयोग से चाइल्ड एब्यूज रोकने के लिए जागरुकता शिविर का आयोजन सिटी सेंट्रल स्कूल ऊषा कॉलोनी भिण्ड में चाइल्ड लाइन डायरेक्टर शिवभान सिंह राठौड़ के मार्गदर्शन में किया गया। राठौड़ ने बच्चों को चाइल्ड एब्यूज, चाइल्ड लाइन 1098 से अवगत कराया।
कार्यक्रम के दौरान नीलकमल सिंह भदौरिया ने कहा कि लगातार चाइल्ड एब्यूज यानी बच्चों के शारीरिक, मानसिक या फिर यौन शोषण के मामले बढ़ते जा रहे हैं, अक्सर अभिभावक बच्चों की परेशानियां समझ नहीं पाते हैं। बच्चे घर में या फिर बाहर किसी एडल्ट द्वारा एब्यूज किए जाते हैं, तो अक्सर डिप्रेशन में चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि चाइल्ड एब्यूज के अधिकांश मामलों में कोई ना कोई परिचित या रिश्तेदार या जान पहचान वाला व्यक्ति ही शामिल होता है। चाइल्ड एब्यूज करने वाले व्यक्ति की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं होती, ऐसा व्यक्ति किसी बड़े पर अपना जोर नहीं चला सकता, इसलिए छोटे बच्चों को एब्यूज करके खुशी पाने की कोशिश करता है, बच्चे इस तरह लोगों से सॉफ्ट टारगेट होते हैं।


उन्होंने चाइल्ड एब्यूज को समझाते हुए बताया कि किसी छोटे बच्चे के साथ कोई बड़ा व्यक्ति मारपीट, मानसिक रूप से परेशान या फिर यौन उत्पीडऩ करता है तो उसे चाइल्ड एब्यूज की केटागिरी में रखा जाता है या अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता पहले खुद समझें चाइल्ड एब्यूज क्या है, यह सामान्य चुहल या फिर हसीठठ्ठा भर नहीं है, हम जाने अनजाने में इसे हल्के में ले लेते हैं। जबकि किसी भी प्रकार का शोषण बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर बुरी तरह से असर डालता है। इसी क्रम में चाइल्ड एब्यूज की पहचान की जा सकती है।
मुख्य अथिति प्राचार्य मनोज मिश्रा ने बताया कि कैसे चाइल्ड एब्यूज की पहचान कि जा सकती है और इसे रोका भी जा सकता है। साथ यह भी समझना होगा कि यह कितनी तरह का होता है, इसमें किस प्रकार का व्यवहार बच्चों के साथ शामिल है। चाइल्ड एब्यूज किसी प्रकार का हो सकता है, जैसे- चाइल्ड मैरिज, चाइल्ड लेबर, चाइल्ड सेक्सुअल, इमोशनल एब्यूज, पोक्सो, अन्य तरह को शोषण चाइल्ड एब्यूज कि केटागरी में आते है। इस मौके पर नीरज दुबे, शिशुपाल यादव, श्रीमती चंद्रकला तोमर, अनमोल चतुर्वेदी, आकाश शर्मा, अजब सिंह स्कूल स्टाफ आदि के सहयोग से कार्यक्रम को सफल बनाया गया।