मसूरी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में उमड़े श्रृद्धालु

भिण्ड, 07 जून। अटेर क्षेत्र के ग्राम मसूरी में सिद्ध स्थान नागेश्वर ताल वाले हनुमान मन्दिर पर गत दो जून से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिसका समापना नौ जून को भण्डारे के साथ किया जाएगा, जिसमें ग्रामीणों के अलावा आस-पास के दो दर्जन से अधिक गांव के श्रृद्धालुगण आकर कथा का रसपान कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार नागेश्वर ताल वाले हनुमान मन्दिर के महंत प्रथुवन जी महाराज के सानिध्य में समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें आज छठवेें दिन मन्दिर के पुजारी व कथा वाचक श्रीश्री 1008 महामण्डलेश्वर महंत श्री रामभूषण दासजी महाराज के मुखारबिन्दु से कही जा रही है, इस कथा में आस-पास के दो दर्जन से अधिक गांव के श्रृद्धालु भारी संख्या में मन्दिर पर पहुंचकर कथा का श्रवण कर रहे हैं, जिस गति से भीड़ का जमावड़ा हो रहा है, उसी के अनुसार श्रृद्धालुओं की व्यवस्था की जा रही है, कथा सुनने आने वाले लोगों को शीतल जल यथा स्थान पर दिया जा रहा है, ताकि भीषण गर्मी का अहसास किसी को न हो, विण्डो कूलर करीब एक दर्जन से अधिक लगाए गए हैं जिनकी शीतल हवा से श्रृद्धालु आराम से कथा का श्रवण कर हैं।

पत्रकारों का किया सम्मान

श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिन पत्रकारों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जहां कथा वाचक श्री रामभूषण महाराज व नागेश्वर ताल वाले हनुमान मन्दिर के महंत के हाथों से पत्रकारों का सम्मान किया गया, पत्रकारों ने भी एकजुटता के साथ कहा कि सम्मान से बढ़कर हमारे लिए आप सभी संतों का आशीर्वाद बना रहे यही हम कामना करते हैं।

मन्दिर की यह है विशेषता

नागेश्वर ताल वाले हनुमान मन्दिर के परम महंत श्री प्रथुमन महाराज से जब मीडिया कर्मियों ने कुछ प्रश्न किए तो मंहत ने विशेषता बताते हुए कहा कि नागेश्वर ताल वाले हनुमान मन्दिर पर जो भी सफेद दाग से पीडि़त है, वह मात्र पांच परिक्रमा लगाकर देखे, 100 नहीं 110 प्रतिशत उसको आराम मिल जाता है, वैसे तो कोई भी आपदा हो इस मन्दिर पर आकर मत्था टेक जाए उसके बिगड़े काम अपने आप बनना शुरू हो जाते हैं।
नागेश्वर ताल वाले हनुमान मन्दिर के महंत प्रथुमन महाराज ने बताया कि कोई भी व्यक्ति अनाथ है, किसी भी समस्या से पीडि़त है, विकलांग है तो उसको मन्दिर पर रुकने से लेकर खाने पीने की अनवरत व्यवस्था है, उक्त गहनशील बातों को सुनकर पण्डाल में बैठे श्रृद्धालुओं ने महाराज जी की बातों की सराहना करते हुए तालियों से उनका स्वागत किया।