मेहगांव पंच कल्याणक में हुआ आदिनाथ का जन्म

भिण्ड, 20 फरवरी। भारत गौरव गणाचार्य विराग सागर महाराज के ससंघ 40 पिच्छियों के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य संदीप शास्त्री द्वारा विधि विधान से नवीन त्रिमर्ति चौबीसी जिन मन्दिर मेहगांव का श्री 1008 मज्जिनेन्द्र आदिनाथ जिनबिंबा पंचकल्याणक वेदी प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव विश्व शांति महायज्ञ के अवसर पर रविवार को भगवान आदिनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव, भगवान की शोभायात्रा बैण्ड बाजों के साथ नगर का भ्रमण करते हुए आयोध्या नगरी बनी पण्डाल पहुंची, जहां पर भगवान का 1008 कलशों से महामस्तिकाभिषेक किया गया।
इस अवसर पर गणाचार्य विराग सागर महाराज ने कहा कि पुण्य पुरुष का जन्मा धरती के पुण्योदय से होता है। भगवान आदिनाथ का कल हम सभी ने गर्भ कल्याणक मनाया, आयोध्या के राजा नाभिराय की पटरानी मरूदेवी मां ने रात्रि में 16 स्वप्ने देखे, जिनका अर्थ बताते हुए राजा नाभिराय ने कहा कि महारानी तुम शीघ्र ही अतिशय प्रतापी तीन लोक में आनंद करने वाले तीर्थंकर महापुरुष को जन्म दोगी। समय व्यतीत हुआ नौ माह पूर्ण होते ही भगवान तीर्थंकर आदिनाथ का जन्म ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी को हुआ।
आचार्यश्री ने कहा कि तीर्थंकर जन्म का एक ऐसा अतिशय होता है कि उस समय एक क्षण के लिए संपूर्ण प्राणियों में आनंद की अनूभूति होती है। तीर्थंकर बालक का जन्म देवों के आसन को कंपायन कर देता है, जिसमें सौधर्म इन्द्र को तीर्थंकर के जन्म का समाचार स्वत: ही प्राप्त हो जाता है। खुशी और आनंद से भरा सौधर्म इन्द्र एक देव को ऐरावत हाथी बनने का आदेश देता हैं, जो सफेद वर्ण का सौ मुख वाला संपूर्ण जम्बूदीप के बराबर होता है। उस ऐरावत हाथी पर अपनी गोद में तीर्थंकर बालक को लेकर सुमेरू पर्वत पर ले जाकर भगवान का जन्माभिषेक करता है। इन्द्राणी शचि बालक का श्रृंगार करती है और बालक को पुन: माता पिता को सौंपती है।

गणाचार्य विराग सागर महाराज का 43वां क्षुल्ल क दीक्षा महोत्सृव

भारत गौरव गणाचार्य श्री विराग सागर महाराज का 43वां क्षुल्लक दीक्षा महोत्स व कार्यक्रम पंचकल्याणक महोत्सव में मनाया। जिसमें आचार्यश्री ने कहा कि आज ही के दिन आचार्य गुरुदेव सन्मति सागर महाराज ने मुझे क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की थी। 16 वर्ष की आयु में गुरुदेव ने हमें परखा और मुझे मोक्ष मार्गी बना दिया, इस दिवस को उपकार दिवस के रूप में मनाते है। उन्होंंने मुझे कल्याण के मार्ग पर बढ़ाकर बड़ा उपकार किया। कार्यक्रम के शुभारंभ में रेजीमेंट टीम ने रंग-बिरंगे ध्वजाओं को लहराते हुए गुरुवर का पूजन एवं पाद प्रक्षालन किया। समाजसेवी अशोक महामाया ने आचार्यश्री को श्रीफल चढ़ाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।